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आज हम अफ्रीका महाद्वीप के बारे में चर्चा करेंगे। अफ्रीका विश्व का एक अत्यंत विशिष्ट, रहस्यमय और प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध महाद्वीप है। इसे ‘अंध महाद्वीप’, ‘काला महाद्वीप’ तथा ‘भविष्य का महाद्वीप’ जैसे उपनामों से भी जाना जाता है। यह महाद्वीप अपनी प्राचीन सभ्यताओं, विविध जनजातीय संस्कृति, विशाल मरुस्थलों, घने वनों, समृद्ध खनिज संसाधनों तथा अद्भुत जैव-विविधता के कारण विश्व में विशेष स्थान रखता है।

परिचय

‘अफ्रीका’ शब्द की उत्पत्ति के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक मत के अनुसार इसकी उत्पत्ति बरबर भाषा के ‘इफ्री’ या ‘इफ्रान’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ ‘गुफा’ होता है। संभवतः आदि मानव के गुफाओं में निवास करने के कारण इस महाद्वीप का नाम अफ्रीका पड़ा। कुछ इतिहासकार यह भी मानते हैं कि मानव सभ्यता का प्रारंभ सर्वप्रथम इसी महाद्वीप से हुआ था। इसी कारण अफ्रीका को मानव सभ्यता की जन्मस्थली भी कहा जाता है।

स्थिति

अफ्रीका विश्व का एकमात्र ऐसा महाद्वीप है जो उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी—चारों गोलार्द्धों में विस्तृत माना जाता है। यह महाद्वीप दोनों गोलार्द्धों में फैला हुआ है तथा कर्क रेखा, विषुवत रेखा और मकर रेखा तीनों इसके मध्य से होकर गुजरती हैं। यही कारण है कि अफ्रीका की जलवायु में अत्यधिक विविधता पाई जाती है। अफ्रीका के उत्तर में भूमध्य सागर, उत्तर-पूर्व में लाल सागर, पूर्व में हिंद महासागर, पश्चिम में अटलांटिक महासागर तथा उत्तर-पूर्व में एशिया महाद्वीप स्थित है, जिससे यह स्वेज नहर द्वारा पृथक होता है। भौगोलिक दृष्टि से अफ्रीका की स्थिति इसे विश्व के अन्य महाद्वीपों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।

अफ्रीका महाद्वीप पृथ्वी के कुल स्थल भाग का लगभग 20.4 प्रतिशत भाग घेरता है। यहाँ विश्व की लगभग 16 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या निवास करती है। अफ्रीका में कुल 54 स्वतंत्र देश हैं। इनमें से कुछ देश मुख्य भूमि से पृथक द्वीपीय राष्ट्र हैं, जैसे - मॉरीशस, मेडागास्कर, सेशेल्स, केप वर्डे, कोमोरोस तथा साओ टोमे और प्रिंसिपे। अफ्रीका में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश अल्जीरिया है, जबकि जनसंख्या की दृष्टि से नाइजीरिया सबसे बड़ा देश है। इसके विपरीत, क्षेत्रफल एवं जनसंख्या दोनों की दृष्टि से सेशेल्स सबसे छोटा देश है। यह एक सुंदर द्वीपीय राष्ट्र है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 471 वर्ग किलोमीटर है।

जलवायु

अफ्रीका को विश्व का सबसे गर्म महाद्वीप कहा जाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि इसका अधिकांश भाग उष्ण कटिबंध में स्थित है। यहाँ वर्ष भर उच्च तापमान पाया जाता है। अफ्रीका में विश्व का सबसे विशाल गर्म मरुस्थल ‘सहारा मरुस्थल’ स्थित है, जो लगभग 94 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। यह मरुस्थल अफ्रीका के लगभग एक-तिहाई भाग पर फैला हुआ है। लीबिया में स्थित अल-अज़ीज़िया अफ्रीका के सबसे गर्म स्थानों में से एक माना जाता है। अफ्रीका के दक्षिणी भाग में कालाहारी मरुस्थल स्थित है, जो बोत्सवाना, नामीबिया तथा दक्षिण अफ्रीका तक विस्तृत है। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिमी तट पर नामिब मरुस्थल भी स्थित है, जो विश्व के प्राचीनतम मरुस्थलों में गिना जाता है। अफ्रीका के विषुवतीय भागों में उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु पाई जाती है। यहाँ वर्ष भर उच्च तापमान एवं अत्यधिक वर्षा होती है। कांगो बेसिन का क्षेत्र घने विषुवतीय वनों से आच्छादित है। इसी क्षेत्र में पिग्मी जनजाति निवास करती है, जो अपने छोटे कद के कारण विश्वविख्यात है।

उच्चावच

अफ्रीका महाद्वीप प्राचीन कठोर चट्टानों से निर्मित है तथा यह प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग रहा है। इसकी अधिकांश भूमि पठारी है, इसलिए इसे ‘पठारों का महाद्वीप’ भी कहा जाता है। अफ्रीका का अधिकांश भाग समुद्र तल से ऊँचा उठा हुआ पठारी प्रदेश है। उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीका में स्थित एटलस पर्वतमाला लगभग 2500 किलोमीटर लंबी है। यह मोरक्को, अल्जीरिया तथा ट्यूनीशिया से होकर गुजरती है। इसका सर्वोच्च शिखर तूबकाल (4167 मीटर) मोरक्को में स्थित है। अफ्रीका का सर्वोच्च पर्वत किलिमंजारो है, जो तंजानिया में स्थित एक सुप्त ज्वालामुखी पर्वत है। इसकी ऊँचाई 5895 मीटर है। यह अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी होने के साथ-साथ विश्व के प्रसिद्ध ज्वालामुखीय पर्वतों में से एक है। विश्व की सबसे लंबी भ्रंश घाटी महान भ्रंश घाटी (Great Rift Valley) अफ्रीका में स्थित है। यह मृत सागर से प्रारंभ होकर मलावी झील तक लगभग 6900 किलोमीटर तक विस्तृत है। यह विश्व की सबसे लंबी दरार घाटी मानी जाती है।

नदियाँ

अफ्रीका की नदियाँ इसकी जीवनरेखा हैं। विश्व की सबसे लंबी नदी नील नदी अफ्रीका में बहती है। इसका उद्गम विक्टोरिया झील क्षेत्र से माना जाता है और यह उत्तर की ओर बहते हुए भूमध्य सागर में गिरती है। इसकी दो प्रमुख सहायक नदियाँ श्वेत नील और नीली नील हैं। नील नदी के अतिरिक्त अफ्रीका की अन्य प्रमुख नदियाँ कांगो (जायरे), नाइजर, जाम्बेजी, ऑरेंज तथा लिम्पोपो हैं। कांगो नदी अफ्रीका की दूसरी सबसे बड़ी नदी है तथा जलप्रवाह की दृष्टि से यह विश्व की प्रमुख नदियों में गिनी जाती है। यह विषुवत रेखा को दो बार काटती है, जो इसकी विशिष्ट भौगोलिक विशेषता है। लिम्पोपो नदी भी मकर रेखा को दो बार काटती है। कांगो नदी अपने विशाल जलप्रवाह तथा जलविद्युत क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।

मरुस्थल

अफ्रीका मरुस्थलों का महाद्वीप भी कहा जाता है। विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल सहारा अफ्रीका में स्थित है। यह मरुस्थल अत्यंत शुष्क, रेतीला और विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र है। यहाँ बददू (Bedouin) जनजाति निवास करती है। अफ्रीका के दक्षिणी भाग में कालाहारी मरुस्थल स्थित है, जहाँ बुशमैन जनजाति निवास करती है। यह क्षेत्र वन्य जीवों, विशेषकर शुतुरमुर्ग के लिए प्रसिद्ध है। नामिब मरुस्थल भी अफ्रीका का महत्त्वपूर्ण मरुस्थल है, जो अपने लाल बालू टीलों के लिए प्रसिद्ध है।

जलप्रपात

अफ्रीका जलप्रपातों की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। जाम्बेजी नदी पर स्थित विक्टोरिया जलप्रपात अफ्रीका का सबसे प्रसिद्ध और विशाल जलप्रपात है। यह विश्व के सबसे भव्य जलप्रपातों में से एक है। इसकी चौड़ाई लगभग 1600 मीटर है। स्थानीय भाषा में इसे ‘मोसी-ओ-तुन्या’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है—‘गरजता हुआ धुआँ’। कांगो नदी पर स्थित स्टेनली तथा लिविंगस्टोन जलप्रपात भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं। ये जलप्रपात अपनी विशाल जलधारा और प्रचंड वेग के कारण विश्वविख्यात हैं।

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि अफ्रीका महाद्वीप प्राकृतिक विविधता, भौगोलिक विशिष्टता, प्राचीन मानव इतिहास, विशाल मरुस्थलों, पठारों, नदियों, जलप्रपातों, खनिज संपदा तथा सांस्कृतिक विविधता के कारण विश्व का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण महाद्वीप है। यही कारण है कि अफ्रीका को न केवल रहस्यों का महाद्वीप, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का महाद्वीप भी कहा जाता है।

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