आस्ट्रेलिया महाद्वीप विश्व के सात महाद्वीपों में सबसे छोटा, परंतु अत्यंत विशिष्ट महाद्वीप है। यह अपने भौगोलिक स्वरूप, प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचना के कारण भी वैश्विक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय है। इसे ‘द्वीपीय महाद्वीप’ (Island Continent) भी कहा जाता है, क्योंकि यह चारों ओर से महासागरों से घिरा हुआ है। दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित यह महाद्वीप भौगोलिक दृष्टि से पृथ्वी का सबसे पृथक एवं अनूठा भू-भाग माना जाता है।
आस्ट्रेलिया महाद्वीप का नामकरण
‘आस्ट्रेलिया’ शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Terra Australis Incognita से मानी जाती है, जिसका अर्थ है - ‘दक्षिण का अज्ञात भू-भाग’ (Unknown Southern Land)। प्राचीन यूरोपीय भूगोलवेत्ताओं का विश्वास था कि दक्षिणी गोलार्द्ध में एक विशाल भू-भाग अवश्य स्थित होगा, जो उत्तरी गोलार्द्ध के भू-भागों का संतुलन बनाए रखता है। इसी काल्पनिक भू-भाग को ‘टेरा ऑस्ट्रेलिस’ कहा गया।
17वीं शताब्दी में डच नाविकों ने इस भू-भाग के तटों की खोज की और इसे New Holland नाम दिया। बाद में ब्रिटिश अन्वेषक कैप्टन जेम्स कुक ने 1770 में पूर्वी तट का सर्वेक्षण किया और इसे ब्रिटेन के अधिकार क्षेत्र में घोषित किया। 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश अन्वेषक मैथ्यू फ्लिंडर्स ने ‘Australia’ नाम का प्रयोग किया, जिसे बाद में औपचारिक मान्यता मिली।
भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार
ग्लोब पर लगभग 10° दक्षिण से 44° दक्षिण अक्षांश एवं लगभग 113° पूर्व से 154° पूर्व देशांतर तक कुल 76.86 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह विश्व का सबसे छोटा महाद्वीप, किंतु छठा सबसे बड़ा देश है। यह महाद्वीप पूर्वी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में फैला हुआ है। यह पूर्णतः महासागरों से घिरा हुआ एकमात्र महाद्वीप है। इसके उत्तर में अराफुरा सागर, तिमोर सागर एवं टोरेस जलडमरूमध्य; दक्षिण में दक्षिणी महासागर; पूर्व में प्रशांत महासागर, कोरल सागर एवं तस्मान सागर तथा पश्चिम में हिन्द महासागर स्थित हैं । इसी कारण इसे ‘द्वीपीय महाद्वीप’ (Island Continent) भी कहा जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे एशिया, अंटार्कटिका तथा प्रशांत क्षेत्र के मध्य एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित होने के कारण यहाँ ऋतुओं का क्रम उत्तरी गोलार्द्ध से विपरीत पाया जाता है।
अक्षांशीय विस्तार एवं चारों और जल की उपस्थिति के कारण आस्ट्रेलिया में उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय, शुष्क तथा समशीतोष्ण सभी प्रकार की जलवायु पाई जाती है। उत्तरी भाग उष्ण एवं आर्द्र है, मध्य भाग शुष्क एवं मरुस्थली, जबकि दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत शीतल एवं समशीतोष्ण है। मकर रेखा इसके मध्य भाग से गुजरती है।यह विश्व का सबसे समतल और शुष्क आबाद महाद्वीप है।
भौतिक संरचना
आस्ट्रेलिया की भौतिक संरचना को सामान्यतः तीन प्रमुख भू-आकृतिक भागों में विभाजित किया जाता है। ये भाग स्थलरूप की दृष्टि से भिन्न ही नहीं हैं, बल्कि उनकी भूगर्भीय संरचना, जलवायु, मृदा, संसाधन तथा मानव उपयोगिता भी एक-दूसरे से स्पष्ट रूप से अलग है -
(क) पश्चिमी पठार (Western Plateau)
पश्चिमी पठार आस्ट्रेलिया का सबसे प्राचीन, विशाल तथा भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। यह महाद्वीप के लगभग दो-तिहाई क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इसकी संरचना मुख्यतः प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से हुई है। यह भू-भाग भूगर्भीय रूप से अत्यंत स्थिर माना जाता है, क्योंकि यहाँ पर्वतनिर्माण की नवीन क्रियाएँ बहुत कम हुई हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र अपेक्षाकृत समतल, शुष्क तथा मरुस्थलीय स्वरूप का दिखाई देता है।
पश्चिमी पठार का अधिकांश भाग ऊबड़-खाबड़ चट्टानी धरातल, निम्न पठारी विस्तार, पथरीले मरुस्थल तथा विरल वनस्पति से युक्त है। यहाँ वर्षा अत्यंत कम होती है, जिसके कारण यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से शुष्क बना रहता है। जल की कमी के बावजूद यह क्षेत्र खनिज संपदा की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है और आस्ट्रेलिया की खनन अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ:
- प्राचीन शिलाओं एवं कठोर चट्टानों से निर्मित भू-भाग
- विशाल मरुस्थलीय क्षेत्र तथा विरल जनसंख्या
- ग्रेट सैंडी मरुस्थल, गिब्सन मरुस्थल एवं ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल का विस्तार
- पिलबरा एवं कालगूर्ली जैसे खनिज समृद्ध क्षेत्र
- लौह अयस्क, सोना, निकेल तथा यूरेनियम की प्रचुरता ।
(ख) मध्य निम्नभूमि (Central Lowlands)
मध्य निम्नभूमि पश्चिमी पठार और पूर्वी उच्चभूमि के मध्य स्थित एक विस्तृत निम्न क्षेत्र है। यह क्षेत्र समुद्र तल से अपेक्षाकृत कम ऊँचाई पर स्थित है तथा आस्ट्रेलिया के आंतरिक जल निकास का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। यह निम्नभूमि भू-आकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ अवसादी निक्षेपों का विशाल संचय पाया जाता है, जो कृषि एवं पशुपालन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है।
इस क्षेत्र में विस्तृत नदी बेसिन, अंत:स्थलीय अपवाह क्षेत्र तथा निम्न झीलें मिलती हैं। मरे-डार्लिंग बेसिन इस क्षेत्र की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी प्रणाली है, जो आस्ट्रेलिया की कृषि अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी प्रकार लेक आयर महाद्वीप का सबसे निम्न एवं अंत:स्थलीय जल निकास वाला क्षेत्र है। मध्य निम्नभूमि का एक बड़ा भाग पशुपालन, विशेषकर भेड़ एवं गाय पालन, तथा सिंचित कृषि के लिए उपयोग में लाया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ:
- पश्चिमी पठार और पूर्वी उच्चभूमि के मध्य विस्तृत निम्न क्षेत्र
- मरे-डार्लिंग बेसिन का विकास
- लेक आयर (Lake Eyre) महाद्वीप का निम्नतम भाग
- कार्पेन्टेरिया निम्नभूमि का विस्तार
- अवसादी मिट्टी एवं कृषि के लिए उपयुक्त भूमि
- सिंचित कृषि एवं पशुपालन का प्रमुख क्षेत्र ।
(ग) पूर्वी उच्चभूमि (Eastern Highlands)
पूर्वी उच्चभूमि आस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग में उत्तर से दक्षिण तक विस्तृत एक प्रमुख पर्वतीय एवं उच्चस्थलीय क्षेत्र है। इसे ‘ग्रेट डिवाइडिंग रेंज’ (Great Dividing Range) भी कहा जाता है। यह आस्ट्रेलिया की सबसे महत्वपूर्ण पर्वतीय प्रणाली है, जो पूर्वी तट के समानांतर हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है। यद्यपि यह हिमालय या एंडीज़ जैसी अत्यधिक ऊँची पर्वतमाला नहीं है, फिर भी आस्ट्रेलिया की स्थलाकृति, जलवायु तथा नदी तंत्र पर इसका गहरा प्रभाव है।
यह क्षेत्र पठारों, पर्वतों, उच्चभूमियों तथा तटीय ढालों से मिलकर बना है। पूर्वी उच्चभूमि से अनेक नदियाँ निकलती हैं, जो पूर्व की ओर प्रशांत महासागर तथा पश्चिम की ओर आंतरिक निम्नभूमि की दिशा में बहती हैं। इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है, जिसके कारण यहाँ कृषि, वनस्पति तथा मानव बसावट का घनत्व अन्य भागों की तुलना में अधिक है। आस्ट्रेलिया के प्रमुख नगर भी इसी क्षेत्र के निकट विकसित हुए हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
- पूर्वी तट के समानांतर उत्तर-दक्षिण दिशा में विस्तृत
- ‘ग्रेट डिवाइडिंग रेंज’ के नाम से प्रसिद्ध
- माउंट कोस्यूस्को (2228 मी.) महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी
- तटीय नदियों का प्रमुख उद्गम स्थल
- अपेक्षाकृत अधिक वर्षा एवं सघन बसावट
कृषि, वन एवं जलविद्युत विकास के लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्र ।
जलवायु
आस्ट्रेलिया की जलवायु अत्यंत विविधतापूर्ण तथा क्षेत्रीय भिन्नताओं से युक्त है। आस्ट्रेलिया उत्तर में उष्ण कटिबंध से लेकर दक्षिण में समशीतोष्ण क्षेत्र तक फैला हुआ है, इसलिए यहाँ जलवायु के अनेक रूप देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि एक ही महाद्वीप में आर्द्र उष्णकटिबंधीय प्रदेश, विस्तृत मरुस्थल, भूमध्यसागरीय क्षेत्र तथा शीतोष्ण समुद्री प्रदेश साथ-साथ पाए जाते हैं।
आस्ट्रेलिया की जलवायु का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष इसकी शुष्कता है। यह विश्व का सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप माना जाता है। महाद्वीप के अधिकांश आंतरिक भागों में वर्षा अत्यंत कम होती है, जिसके कारण वहाँ मरुस्थलीय एवं अर्द्ध-शुष्क दशाएँ विकसित हो गई हैं। इसके विपरीत तटीय क्षेत्रों, विशेषकर पूर्वी एवं उत्तरी भागों में समुद्री प्रभाव के कारण अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है। इस प्रकार आस्ट्रेलिया की जलवायु में स्पष्ट क्षेत्रीय असमानता पाई जाती है।
जलवायु के प्रमुख प्रकार
(क) उष्णकटिबंधीय जलवायु
आस्ट्रेलिया के उत्तरी भाग में उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। यह क्षेत्र क्वींसलैंड के उत्तरी भाग, नॉर्दर्न टेरिटरी तथा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी भागों में विस्तृत है। यहाँ वर्ष भर तापमान उच्च रहता है तथा ग्रीष्म ऋतु में अधिक वर्षा होती है। उत्तरी भाग में मानसूनी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है, जिसके कारण यहाँ ग्रीष्मकाल आर्द्र तथा वर्षायुक्त होता है, जबकि शीतकाल अपेक्षाकृत शुष्क रहता है। क्षेत्र में सवाना प्रकार की वनस्पति, मौसमी घासभूमि तथा उष्णकटिबंधीय झाड़ीदार प्रदेश पाए जाते हैं। डार्विन जैसे नगर इसी जलवायु क्षेत्र में स्थित हैं।
(ख) मरुस्थलीय एवं अर्द्ध-शुष्क जलवायु
आस्ट्रेलिया के मध्य एवं आंतरिक भागों में मरुस्थलीय जलवायु का विस्तार है। यह महाद्वीप का सबसे विशाल जलवायु प्रदेश है। यहाँ वर्षा अत्यंत कम, अनियमित तथा असमान रूप से होती है। तापमान में दिन और रात के बीच अत्यधिक अंतर पाया जाता है। दिन में अत्यधिक गर्मी तथा रात्रि में तापमान में तीव्र गिरावट इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषता है। ग्रेट सैंडी, गिब्सन, सिम्पसन तथा ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल इसी क्षेत्र में स्थित हैं। जल की कमी, विरल वनस्पति, कम जनसंख्या तथा पशुपालन-आधारित अर्थव्यवस्था इस प्रदेश की विशेष पहचान है।
(ग) भूमध्यसागरीय जलवायु
दक्षिण-पश्चिमी आस्ट्रेलिया, विशेषकर पर्थ के आसपास, भूमध्यसागरीय जलवायु पाई जाती है। इस जलवायु की मुख्य विशेषता है - गर्म एवं शुष्क ग्रीष्म ऋतु तथा शीतल एवं आर्द्र शीत ऋतु। यह जलवायु कृषि की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। क्षेत्र में गेहूँ, अंगूर, जैतून तथा फलोत्पादन का विकास हुआ है। भूमध्यसागरीय प्रकार की जलवायु के कारण यह क्षेत्र कृषि एवं बागवानी का महत्त्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
(घ) समशीतोष्ण जलवायु
दक्षिण-पूर्वी भाग, विशेषकर न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया तथा तस्मानिया में समशीतोष्ण जलवायु पाई जाती है। यहाँ तापमान अपेक्षाकृत संतुलित रहता है तथा वर्षा वर्ष भर किसी न किसी रूप में प्राप्त होती है। यह क्षेत्र आस्ट्रेलिया का सर्वाधिक अनुकूल एवं सघन जनसंख्या वाला भाग है। मेलबर्न, सिडनी तथा होबार्ट जैसे नगर इसी जलवायु क्षेत्र में स्थित हैं। यहाँ कृषि, उद्योग, परिवहन तथा नगरीकरण का उच्च विकास हुआ है।
प्रमुख जलवायवीय विशेषताएँ
- आस्ट्रेलिया विश्व का सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप है
- वर्षा का वितरण अत्यंत असमान एवं अनियमित है
- आंतरिक भागों में अत्यधिक तापांतर पाया जाता है
- उत्तरी भाग में मानसूनी प्रभाव स्पष्ट है
- पूर्वी तट पर समुद्री प्रभाव से आर्द्रता अधिक रहती है
- पश्चिमी तट अपेक्षाकृत शुष्क है
- दक्षिणी भागों में शीतोष्ण एवं संतुलित जलवायु मिलती है
- सूखा, झाड़ीदार आग (Bushfire) तथा जलवायु परिवर्तन प्रमुख चुनौतियाँ हैं
आस्ट्रेलिया की जलवायु का यहाँ की कृषि, बसावट, अर्थव्यवस्था तथा जीवन-शैली पर गहरा प्रभाव पड़ता है। शुष्क आंतरिक भागों में जनसंख्या विरल है, जबकि समशीतोष्ण एवं आर्द्र तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या सघन रूप से निवास करती है। कृषि का विकास मुख्यतः उन क्षेत्रों में हुआ है जहाँ वर्षा या सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में पशुपालन अधिक महत्त्वपूर्ण है, जबकि दक्षिण-पूर्वी एवं दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में मिश्रित कृषि विकसित हुई है।
प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्यजीव
यह महाद्वीप जैव-भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट माना जाता है, क्योंकि यह लाखों वर्षों तक अन्य महाद्वीपों से पृथक रहा। इसी भौगोलिक पृथक्करण के कारण यहाँ की वनस्पति एवं जीव-जंतु स्वतंत्र रूप से विकसित हुए, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ अनेक ऐसी प्रजातियाँ विकसित हुईं जो विश्व के अन्य भागों में नहीं पाई जातीं। यही कारण है कि आस्ट्रेलिया को ‘स्थानिक जैव विविधता का महाद्वीप’ भी कहा जाता है। इसके उत्तरी भाग में उष्णकटिबंधीय वनस्पति, मध्य भाग में मरुस्थलीय वनस्पति, दक्षिणी भाग में समशीतोष्ण वन तथा पूर्वी भाग में सघन तटीय वन पाए जाते हैं। इस प्रकार आस्ट्रेलिया की प्राकृतिक वनस्पति जलवायु के साथ गहरे रूप से जुड़ी हुई है।
आस्ट्रेलिया की प्राकृतिक वनस्पति की सबसे प्रमुख विशेषता इसका अनुकूलन (Adaptation) है। यहाँ की अधिकांश वनस्पतियाँ कम वर्षा, उच्च तापमान तथा शुष्क परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हुई हैं। अनेक पौधों की पत्तियाँ कठोर, संकरी एवं मोमी होती हैं, जिससे वाष्पोत्सर्जन कम हो सके। यही कारण है कि यहाँ की वनस्पति जलवायु-अनुकूलन का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
प्रमुख वनस्पति
(क) यूकेलिप्टस वन
यूकेलिप्टस आस्ट्रेलिया की सर्वाधिक प्रसिद्ध एवं विशिष्ट वनस्पति है। यह वृक्ष न केवल आस्ट्रेलिया की पहचान है, बल्कि इसकी पारिस्थितिकी का आधार भी है। यूकेलिप्टस की सैकड़ों प्रजातियाँ आस्ट्रेलिया में पाई जाती हैं। ये वृक्ष शुष्कता-सहिष्णु, तीव्र वृद्धि वाले तथा अग्नि-अनुकूलित होते हैं। इनकी पत्तियों में सुगंधित तेल पाया जाता है, जो औषधीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। यूकेलिप्टस वन मुख्यतः पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी तथा दक्षिण-पश्चिमी भागों में पाए जाते हैं। ये वन लकड़ी, कागज, औषधि तथा पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। कोआला जैसे जीव इन वनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहते हैं।
(ख) सवाना घासभूमि
उत्तरी आस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय भागों में सवाना प्रकार की घासभूमि पाई जाती है। यह क्षेत्र मौसमी वर्षा से प्रभावित है, जहाँ वर्षा ऋतु में घास तेजी से बढ़ती है तथा शुष्क ऋतु में सूख जाती है। इन घासभूमियों में विरल वृक्षों एवं झाड़ियों के साथ लंबी घास का विस्तार मिलता है। यह क्षेत्र पशुपालन, विशेषकर गाय पालन, के लिए अत्यंत उपयुक्त है। उत्तरी आस्ट्रेलिया की आर्थिक गतिविधियों में इन घासभूमियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
(ग) मरुस्थलीय झाड़ियाँ
आस्ट्रेलिया के मध्य एवं पश्चिमी भागों में मरुस्थलीय एवं अर्द्ध-शुष्क वनस्पति पाई जाती है। यहाँ वर्षा अत्यंत कम होने के कारण विरल झाड़ियाँ, कांटेदार पौधे तथा सूखा-सहिष्णु वनस्पतियाँ विकसित हुई हैं। स्पिनिफेक्स घास, एकेशिया (Acacia) तथा निम्न झाड़ियाँ इस क्षेत्र की प्रमुख वनस्पतियाँ हैं। ये वनस्पतियाँ कम जल में जीवित रहने, गहरी जड़ें विकसित करने तथा उच्च तापमान सहने की क्षमता रखती हैं। मरुस्थलीय वनस्पति आस्ट्रेलिया की शुष्क पारिस्थितिकी का प्रतिनिधित्व करती है।
(घ) समशीतोष्ण वन
दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया तथा तस्मानिया में समशीतोष्ण वन पाए जाते हैं। यहाँ अपेक्षाकृत अधिक वर्षा, मध्यम तापमान तथा अनुकूल जलवायु के कारण सघन वन विकसित हुए हैं। इन वनों में यूकेलिप्टस के अतिरिक्त ओक, बीच तथा मिश्रित वृक्ष प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं। ये वन लकड़ी, जैव विविधता तथा जल संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। तस्मानिया के वन विशेष रूप से समृद्ध एवं संरक्षित माने जाते हैं।
वन्यजीव
आस्ट्रेलिया के वन्यजीव विश्व के अन्य महाद्वीपों की तुलना में अत्यंत भिन्न एवं विशिष्ट हैं। यहाँ के अधिकांश स्तनधारी मार्सूपियल (Marsupial) वर्ग के हैं, अर्थात वे अपने शिशुओं को पेट की थैली में रखते हैं। यह विशेषता आस्ट्रेलिया के वन्यजीवों को विश्व में अद्वितीय बनाती है। इसके अतिरिक्त यहाँ अंडज स्तनधारी (Monotremes) भी पाए जाते हैं, जो अत्यंत दुर्लभ हैं।
प्रमुख वन्यजीव
(क) कंगारू
कंगारू आस्ट्रेलिया का सर्वाधिक प्रसिद्ध राष्ट्रीय पशु है। यह एक मार्सूपियल स्तनधारी है, जो अपनी शक्तिशाली पिछली टांगों एवं लंबी पूँछ के कारण दूर-दूर तक छलांग लगाने में सक्षम होता है। कंगारू घासभूमियों, झाड़ीदार प्रदेशों तथा खुले वनों में पाए जाते हैं।
(ख) कोआला
कोआला एक वृक्षवासी मार्सूपियल जीव है, जो मुख्यतः यूकेलिप्टस वनों में पाया जाता है। यह शांत स्वभाव का जीव है तथा यूकेलिप्टस की पत्तियाँ इसका मुख्य भोजन हैं। कोआला आस्ट्रेलिया की जैविक पहचान का प्रमुख प्रतीक है।
(ग) वॉम्बैट
वॉम्बैट एक छोटा, स्थूल एवं बिल बनाने वाला मार्सूपियल जीव है। यह मुख्यतः दक्षिणी एवं तस्मानियाई क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी शारीरिक संरचना इसे भूमिगत जीवन के लिए उपयुक्त बनाती है।
(घ) प्लैटिपस
प्लैटिपस विश्व के सबसे विचित्र जीवों में से एक है। यह अंडे देने वाला स्तनधारी (Monotreme) है, जिसमें पक्षी, सरीसृप और स्तनधारी के मिश्रित लक्षण दिखाई देते हैं। यह मुख्यतः नदियों एवं मीठे जल स्रोतों के निकट पाया जाता है।
(ङ) इमू
इमू आस्ट्रेलिया का एक बड़ा, उड़ानहीन पक्षी है। यह तीव्र गति से दौड़ सकता है तथा खुले घासभूमि क्षेत्रों में पाया जाता है। इमू आस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय प्रतीकों में सम्मिलित है।
NET/JRF (Geography) की तैयारी करने वाले विद्यार्थी हमारे द्वारा निर्मित प्रश्न - पत्र अवश्य हल करें, जिससे आपको अपनी तैयारी का पता चल सके -
Geography - 01
Geography - 02