दोस्तों, नमस्कार !!

आपने ‘अफ्रीका (भाग–1)’ में अफ्रीका महाद्वीप से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण तथ्यों का अध्ययन किया था। उस भाग में हमने अफ्रीका की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, उच्चावच, नदियाँ, मरुस्थल तथा जलप्रपातों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की थी। अब ‘अफ्रीका (भाग–2)’ में हम इस अद्भुत महाद्वीप के कुछ और महत्त्वपूर्ण, रोचक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से उपयोगी तथ्यों का अध्ययन करेंगे। इस भाग में विशेष रूप से अफ्रीका की झीलों, प्राकृतिक वनस्पति, वन्यजीव, घास के मैदानों, खनिज संपदा तथा कुछ विशेष भौगोलिक तथ्यों पर चर्चा की जाएगी। अफ्रीका महाद्वीप विशाल मरुस्थलों और वन्यजीवों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यह विशाल झीलों, सघन वनों, विस्तृत घास के मैदानों, बहुमूल्य खनिजों तथा अद्भुत जैव-विविधता का भी महाद्वीप है। यही कारण है कि अफ्रीका को प्राकृतिक वैभव और भविष्य की असीम संभावनाओं का महाद्वीप कहा जाता है।

झीलें

अफ्रीका महाद्वीप में अनेक झीलें स्थित हैं, जिनमें से कई अपनी विशालता, भौगोलिक अवस्थिति, जल-संपदा तथा प्राकृतिक सौंदर्य के कारण विश्वविख्यात हैं। अफ्रीका की झीलें प्राकृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होने के साथ-साथ जल संसाधन, मत्स्य पालन, सिंचाई, जल परिवहन, जलविद्युत तथा स्थानीय जलवायु संतुलन में भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अफ्रीका की प्रमुख झीलों में चाड झील विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह झील सहारा मरुस्थल के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण चाड झील अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। यह झील चाड, नाइजर, नाइजीरिया तथा कैमरून के मध्यवर्ती क्षेत्र में स्थित है। चाड झील का जल इन देशों के लिए सिंचाई, पशुपालन और पेयजल का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। मरुस्थलीय प्रदेश में स्थित होने के कारण इसका क्षेत्रफल वर्षा के अनुसार घटता-बढ़ता रहता है।

विक्टोरिया झील अफ्रीका की सबसे प्रसिद्ध झीलों में से एक है। यह नील नदी के उद्गम क्षेत्र से संबंधित है तथा विश्व की दूसरी सबसे बड़ी मीठे पानी की झील मानी जाती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह अफ्रीका की सबसे बड़ी झील है। यह झील तंजानिया, युगांडा और केन्या के मध्य स्थित है। विक्टोरिया झील पूर्वी अफ्रीका के आर्थिक जीवन का आधार मानी जाती है, क्योंकि यह मत्स्य पालन, जल परिवहन और जलवायु संतुलन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

तांगान्यीका झील महान अफ्रीकी झीलों में से एक है। यह विश्व की सबसे लंबी मीठे पानी की झील मानी जाती है। इसकी लंबाई और गहराई दोनों ही इसे अत्यंत विशिष्ट बनाती हैं। यह झील तंजानिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, बुरुंडी तथा जाम्बिया के बीच स्थित है। तांगान्यीका झील जैव विविधता, मत्स्य संपदा और वैज्ञानिक अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह विश्व की सबसे गहरी झीलों में भी गिनी जाती है।

मालावी झील अफ्रीका की एक अन्य प्रमुख झील है, जो अपनी स्वच्छता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह झील मुख्यतः मलावी, मोज़ाम्बिक और तंजानिया के बीच स्थित है। कीवू झील तथा एडवर्ड झील पूर्वी अफ्रीका के भ्रंश घाटी क्षेत्रों में स्थित हैं और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं। तुर्काना झील केन्या में स्थित एक महत्त्वपूर्ण झील है, जिसे ‘जेड सागर’ भी कहा जाता है।

वन एवं वन्य जीव

अफ्रीका की प्राकृतिक वनस्पति उसकी जलवायु पर आधारित है। चूँकि अफ्रीका में जलवायु की अत्यधिक विविधता पाई जाती है, इसलिए यहाँ की वनस्पति एवं वन्यजीवन में भी व्यापक विविधता देखने को मिलती है। अफ्रीका के विभिन्न जलवायु प्रदेशों में भिन्न-भिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु पाए जाते हैं।

अफ्रीका के विषुवतीय क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान एवं वर्ष भर नियमित वर्षा के कारण सघन सदाबहार वन पाए जाते हैं। ये वन अत्यंत घने होते हैं, जहाँ सूर्य का प्रकाश भी धरातल तक पूर्ण रूप से नहीं पहुँच पाता। वर्ष भर वर्षा होने के कारण ये वन सदैव हरे-भरे रहते हैं। इन वनों में महोगनी, रबर, ताड़, आबनूस, गट्टापार्चा, बाँस, सिनकोना तथा रोजवुड जैसे बहुमूल्य वृक्ष पाए जाते हैं। इन वनों में अनेक प्रकार के जंगली जीव पाए जाते हैं। बंदर, हाथी, दरियाई घोड़ा, चिम्पांजी, गोरिल्ला, चीता, भैंसा, साँप, अजगर तथा अनेक प्रकार के पक्षी एवं सरीसृप यहाँ निवास करते हैं। कांगो बेसिन के घने वन विश्व के प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों में गिने जाते हैं। यह क्षेत्र पृथ्वी के सबसे महत्त्वपूर्ण वर्षावनों में से एक है। विषुवतीय क्षेत्र के दोनों ओर स्थित उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है। यहाँ विस्तृत घास के मैदान पाए जाते हैं, जिन्हें सवाना घास के मैदान कहा जाता है। इन घासों की ऊँचाई सामान्यतः 2 से 4 मीटर तक होती है। सवाना घास के मैदान अफ्रीका के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव प्रदेश हैं। इन मैदानों में घास खाने वाले अनेक पशु पाए जाते हैं, जैसे - हिरण, बारहसिंघा, जेब्रा, जिराफ, हाथी तथा भैंसे। इन पशुओं का शिकार करने वाले मांसाहारी जीव, जैसे - शेर, चीता, लकड़बग्घा, जंगली कुत्ते एवं गीदड़ भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। अफ्रीका के सवाना घास के मैदान विश्व के प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों का आधार हैं। तंजानिया का सेरेनगेटी और केन्या का मासाईमारा इसी क्षेत्र के प्रसिद्ध वन्यजीव क्षेत्र हैं। मरुस्थलीय प्रदेशों में वर्षा अत्यंत अल्प होती है, इसलिए वहाँ मरुस्थलीय वनस्पति पाई जाती है। मरुद्यानों में खजूर के वृक्ष प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में ऊँट मुख्य पशु है, जिसे ‘रेगिस्तान का जहाज’ कहा जाता है। शुतुरमुर्ग यहाँ का प्रमुख पक्षी है। इसके अतिरिक्त लोमड़ी, सर्प एवं छिपकलियाँ भी इन क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

अफ्रीका के उत्तरी तथा दक्षिणी-पश्चिमी तटीय भागों में भूमध्यसागरीय जलवायु पाई जाती है। यहाँ शीत ऋतु में वर्षा होती है तथा चौड़ी पत्ती वाले सदाबहार वन पाए जाते हैं। यह क्षेत्र फलों की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यहाँ नींबू, संतरा, अंगूर, सेब, अंजीर आदि रसदार फलों की खेती की जाती है। इस क्षेत्र में जंगली पशु अपेक्षाकृत कम तथा पालतू पशु अधिक पाए जाते हैं।अफ्रीका के दक्षिणी-पूर्वी भागों में वर्षा की कमी के कारण शुष्क घास के मैदान पाए जाते हैं। यहाँ उगने वाली घास छोटी, मुलायम एवं गुच्छेदार होती है। इन घास के मैदानों को ‘वेल्ड’ कहा जाता है। ये घास के मैदान पशुपालन के लिए अत्यंत उपयुक्त माने जाते हैं और दक्षिण अफ्रीका में इनका आर्थिक महत्त्व बहुत अधिक है।

खनिज संपदा

अफ्रीका महाद्वीप प्राचीन गोंडवानालैंड का भाग होने के कारण खनिज संपदा से अत्यंत समृद्ध है। यह महाद्वीप विश्व के प्रमुख खनिज उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। सोना, हीरा, प्लेटिनम, कोबाल्ट, तांबा, यूरेनियम तथा फॉस्फेट जैसे बहुमूल्य खनिजों की दृष्टि से अफ्रीका विश्व में विशेष स्थान रखता है।

अफ्रीका के विभिन्न देशों में अनेक प्रकार के खनिजों के विशाल भंडार पाए जाते हैं। गिनी बॉक्साइट उत्पादन में विश्व के प्रमुख देशों में सम्मिलित है। मोरक्को फॉस्फेट उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध है तथा इस क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में गिना जाता है। जाम्बिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ताँबा एवं कोबाल्ट उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। दक्षिण अफ्रीका खनिज संपदा की दृष्टि से अफ्रीका का सबसे समृद्ध देश है। दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग नगर के निकट सोने का विशाल उत्पादन होता है, जिसके कारण जोहांसबर्ग को ‘स्वर्ण नगर’ कहा जाता है। यह नगर अफ्रीका का प्रमुख औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्र भी है। दक्षिण अफ्रीका का कारू (Karoo) पठार हीरे के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित किम्बरली विश्व की सबसे प्रसिद्ध हीरा खानों में से एक है। किम्बरली को ‘हीरों का नगर’ कहा जाता है। यह क्षेत्र विश्व के हीरा उद्योग का ऐतिहासिक केंद्र रहा है।

विविध तथ्य

  • विषुवत रेखा अफ्रीका के अनेक देशों से होकर गुजरती है। इनमें सोमालिया, केन्या, युगांडा, कांगो गणराज्य, गैबोन तथा साओ टोमे आदि प्रमुख देश सम्मिलित हैं।

  • अफ्रीका का ट्रांसवाल क्षेत्र अपने विशाल वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ विश्व का सबसे बड़ा स्थलीय प्राणी हाथी, सबसे लंबा जानवर जिराफ तथा जेब्रा बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।

  • अफ्रीका का केप–काहिरा रेलमार्ग महाद्वीप का सबसे लंबा रेलमार्ग है। यह दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन को मिस्र की राजधानी काहिरा से जोड़ता है। यह मार्ग अफ्रीका के उत्तर-दक्षिण संपर्क की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

  • तंजानिया के पूर्व में स्थित पेम्बा और जंजीबार द्वीप लौंग एवं इलायची के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। ये द्वीप मसाला उत्पादन के कारण विश्वविख्यात हैं।

  • अफ्रीका का कांगो बेसिन विश्व का दूसरा सबसे बड़ा वर्षावन क्षेत्र है, जो जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि अफ्रीका महाद्वीप केवल विशाल मरुस्थलों, नदियों और वन्यजीवों का ही महाद्वीप नहीं है, बल्कि यह झीलों, घास के मैदानों, खनिज संपदा, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक संभावनाओं का भी अद्वितीय भंडार है। यही कारण है कि अफ्रीका महाद्वीप को प्राकृतिक वैभव, वन्य जीवन, खनिज समृद्धि और भविष्य की अपार संभावनाओं का महाद्वीप कहा जाता है।