नमस्कार !! दोस्तों  आज आस्ट्रेलिया महाद्वीप के प्राकृतिक संसाधन, नदियाँ, झीलें, झरने तथा खनिज संसाधन के बारें में जानेंगे - 

आस्ट्रेलिया महाद्वीप विश्व का सबसे छोटा, परंतु प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और विशिष्ट महाद्वीप है। यद्यपि इसे विश्व का सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप कहा जाता है, फिर भी प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से इसका स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यहाँ विस्तृत खनिज भंडार, विविध जल संसाधन, विशाल घासभूमियाँ, अद्वितीय वन संपदा, समृद्ध समुद्री जैव विविधता तथा ऊर्जा संसाधनों की उल्लेखनीय उपलब्धता पाई जाती है। आस्ट्रेलिया की भौगोलिक पृथकता, प्राचीन भूगर्भीय संरचना, विविध जलवायु तथा विशिष्ट स्थलरूप ने इसे प्राकृतिक संपदा से समृद्ध बनाया है।

आस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधन

प्राकृतिक संसाधन वे संपदाएँ हैं, जो प्रकृति द्वारा मानव को प्रदान की जाती हैं और जिनका उपयोग मानव जीवन, उत्पादन, अर्थव्यवस्था तथा विकास के लिए किया जाता है। आस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध महाद्वीप है। यहाँ भूमि, जल, वन, घासभूमि, समुद्री संसाधन, खनिज संसाधन तथा ऊर्जा संसाधनों की प्रचुरता पाई जाती है। यद्यपि महाद्वीप का अधिकांश भाग शुष्क है, फिर भी उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग इसे विश्व के सबसे समृद्ध देशों में स्थान दिलाता है। आस्ट्रेलिया के प्राकृतिक संसाधनों को निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

  • भूमि संसाधन
  • जल संसाधन
  • वन संसाधन
  • घासभूमि संसाधन
  • समुद्री संसाधन
  • खनिज संसाधन
  • ऊर्जा संसाधन

() भूमि संसाधन

आस्ट्रेलिया की भूमि संसाधन विविधतापूर्ण हैं। यद्यपि इसका अधिकांश आंतरिक भाग शुष्क, पथरीला एवं मरुस्थलीय है, फिर भी तटीय एवं नदी घाटी क्षेत्रों में उपजाऊ भूमि पाई जाती है। मरे-डार्लिंग बेसिन, पूर्वी तटीय मैदान, दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र तथा तस्मानिया के कुछ भाग कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। इन क्षेत्रों में गेहूँ, जौ, गन्ना, कपास, फल, अंगूर तथा तिलहन की खेती की जाती है।

भूमि उपयोग की दृष्टि से आस्ट्रेलिया में कृषि, चरागाह, वन क्षेत्र, खनन क्षेत्र तथा नगरीय क्षेत्र का स्पष्ट विभाजन देखा जाता है। विशाल चरागाह भूमि के कारण यहाँ पशुपालन का अत्यधिक विकास हुआ है। भूमि संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, सिंचाई, मृदा संरक्षण तथा कृषि तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाई गई है।

() जल संसाधन

आस्ट्रेलिया में जल संसाधन सीमित किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। वर्षा का वितरण अत्यंत असमान होने के कारण जल संसाधनों का उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाता है। नदियाँ, झीलें, भूमिगत जल, जलाशय, बाँध तथा वर्षा जल संरक्षण यहाँ के प्रमुख जल स्रोत हैं।

महाद्वीप के शुष्क स्वरूप के कारण जल संरक्षण आस्ट्रेलिया की जीवनरेखा है। यहाँ भूमिगत जल, विशेषकर ग्रेट आर्टीज़ियन बेसिन (Great Artesian Basin), अत्यंत महत्त्वपूर्ण जल स्रोत है। यह विश्व के सबसे बड़े भूमिगत जल भंडारों में से एक है और आंतरिक क्षेत्रों में मानव बसावट, पशुपालन तथा कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी है। जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन ने आस्ट्रेलिया को जल-अभाव के बावजूद कृषि एवं औद्योगिक विकास में सक्षम बनाया है।

() वन संसाधन

आस्ट्रेलिया में यूकेलिप्टस, एकेशिया, समशीतोष्ण मिश्रित वन तथा उष्णकटिबंधीय वन पाए जाते हैं। ये वन लकड़ी, कागज, औषधि, रेज़िन, जैव विविधता तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। तस्मानिया, क्वींसलैंड तथा पूर्वी तटीय क्षेत्र वन संपदा के प्रमुख केंद्र हैं।

वन संसाधनों का आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्त्व है। ये वर्षा संरक्षण, मृदा अपरदन नियंत्रण, वन्यजीव संरक्षण तथा कार्बन अवशोषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यूकेलिप्टस वन आस्ट्रेलिया की पारिस्थितिकी का आधार माने जाते हैं।

() घासभूमि संसाधन

उत्तरी सवाना घासभूमियाँ तथा आंतरिक घास प्रदेश पशुपालन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। भेड़ एवं गाय पालन आस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। विश्व प्रसिद्ध मेरिनो भेड़ें आस्ट्रेलिया में पाली जाती हैं, जिनसे उच्च गुणवत्ता की ऊन प्राप्त होती है। घासभूमियाँ प्राकृतिक चरागाह के रूप में उपयोग की जाती हैं। ये पशुधन-आधारित अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करती हैं तथा दुग्ध, मांस एवं ऊन उद्योग के विकास में सहायक हैं।

() समुद्री संसाधन

आस्ट्रेलिया चारों ओर से महासागरों से घिरा है, अतः यहाँ मत्स्य संसाधन, प्रवाल भित्तियाँ, समुद्री जैव विविधता, समुद्री खनिज तथा अपतटीय ऊर्जा संसाधन अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। ग्रेट बैरियर रीफ विश्व की सबसे बड़ी प्रवाल भित्ति है, जो जैव विविधता, पर्यटन तथा समुद्री अध्ययन की दृष्टि से विश्वविख्यात है। समुद्री संसाधन मत्स्य उद्योग, पर्यटन, समुद्री व्यापार तथा अपतटीय ऊर्जा उत्पादन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। समुद्री क्षेत्र आस्ट्रेलिया की आर्थिक शक्ति का एक महत्त्वपूर्ण आधार है।

आस्ट्रेलिया की नदियाँ

आस्ट्रेलिया की नदियाँ अन्य महाद्वीपों की तुलना में अपेक्षाकृत छोटी, मौसमी तथा कम जल वाली हैं। इसका प्रमुख कारण कम वर्षा, शुष्क जलवायु, आंतरिक भागों की मरुस्थलीय दशाएँ तथा उच्च वाष्पीकरण दर है। यही कारण है कि यहाँ की अधिकांश नदियाँ या तो मौसमी प्रवाह वाली हैं अथवा वर्षा पर अत्यधिक निर्भर रहती हैं। फिर भी आस्ट्रेलिया की नदियाँ कृषि, सिंचाई, जलविद्युत, परिवहन, पारिस्थितिकी, मत्स्य पालन तथा मानव बसावट के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। महाद्वीप के शुष्क स्वरूप के बावजूद नदियों ने यहाँ के आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।

आस्ट्रेलिया की नदियों का स्वरूप अन्य महाद्वीपों से भिन्न है। यहाँ हिमनद-जनित विशाल नदियों का अभाव है और अधिकांश नदियाँ वर्षा-आधारित हैं। नदियों का जलस्तर मौसम के अनुसार तीव्र परिवर्तन दर्शाता है। पूर्वी तटीय क्षेत्रों की नदियाँ अपेक्षाकृत अधिक स्थायी हैं, जबकि आंतरिक भागों की नदियाँ प्रायः अस्थायी या मौसमी होती हैं। यही कारण है कि आस्ट्रेलिया की नदी प्रणाली जलवायु और स्थलरूप के प्रभाव का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। आस्ट्रेलिया की नदियों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है

  • बाह्य अपवाह वाली नदियाँ
  • अंत:स्थलीय अपवाह वाली नदियाँ

() बाह्य अपवाह वाली नदियाँ

वे नदियाँ जो महासागरों या समुद्रों में गिरती हैं, बाह्य अपवाह वाली नदियाँ कहलाती हैं। ये नदियाँ मुख्यतः पूर्वी उच्चभूमि एवं तटीय क्षेत्रों से निकलती हैं। पूर्वी तट पर अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होने के कारण इन नदियों का प्रवाह अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। मरे, डार्लिंग, मुर्रमबिजी, बर्डिकिन तथा फिट्जरॉय जैसी नदियाँ इस वर्ग में आती हैं।

() अंत:स्थलीय अपवाह वाली नदियाँ

वे नदियाँ जो समुद्र तक नहीं पहुँचतीं और आंतरिक झीलों, दलदलों या निम्नभूमियों में समाप्त हो जाती हैं, अंत:स्थलीय अपवाह वाली नदियाँ कहलाती हैं। ये नदियाँ मुख्यतः शुष्क आंतरिक भागों में पाई जाती हैं। कूपर क्रीक, डायमंटीना तथा जॉर्जिना जैसी नदियाँ इस वर्ग की प्रमुख उदाहरण हैं। ये नदियाँ वर्षा ऋतु में सक्रिय होती हैं और शुष्क मौसम में सूख जाती हैं।

(1) मरे नदी (Murray River)

मरे नदी आस्ट्रेलिया की सबसे महत्त्वपूर्ण, सर्वाधिक उपयोगी तथा आर्थिक दृष्टि से सबसे प्रभावशाली नदी मानी जाती है। यह नदी दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया के विशाल भू-भाग को जीवन प्रदान करती है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था की वास्तविक जीवनरेखा कही जाती है। इसका उद्गम पूर्वी उच्चभूमि के ऑस्ट्रेलियन आल्प्स (Australian Alps) क्षेत्र में स्थित माउंट कोस्यूस्को के निकट होता है। यहाँ से यह नदी पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती हुई न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया तथा दक्षिण ऑस्ट्रेलिया से होकर गुजरती है और अंततः दक्षिणी महासागर में गिर जाती है।

यह नदी देश के सबसे उत्पादक कृषि क्षेत्रों को जल प्रदान करती है। इसके तटों के निकट सिंचित कृषि, बागवानी, फलोत्पादन, डेयरी उद्योग तथा ग्रामीण बसावट का व्यापक विकास हुआ है। इस नदी के किनारे अंगूर, संतरा, गेहूँ, जौ, कपास तथा विभिन्न फल-फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यही कारण है कि मरे नदी को आस्ट्रेलिया की कृषि जीवनरेखा कहा जाता है।

मरे नदी मरे-डार्लिंग बेसिन की मुख्य धुरी है। यह विशाल नदी तंत्र आस्ट्रेलिया के कुल कृषि उत्पादन का एक बड़ा भाग उपलब्ध कराता है। मरे नदी पर अनेक बाँध, नहरें तथा सिंचाई परियोजनाएँ विकसित की गई हैं, जिनके माध्यम से जल का नियंत्रित उपयोग किया जाता है। जल प्रबंधन की दृष्टि से यह नदी राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके जल का उपयोग सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक कार्यों तथा पर्यावरणीय संरक्षण के लिए किया जाता है।

मरे नदी का पारिस्थितिक महत्त्व भी अत्यंत गहरा है। इसके किनारे आर्द्रभूमियाँ, दलदली क्षेत्र, जलपक्षियों के आवास तथा समृद्ध नदीय पारितंत्र विकसित हुए हैं। यह नदी अनेक जलीय जीवों, मछलियों तथा पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास प्रदान करती है। जलवायु परिवर्तन, अति-सिंचाई तथा जल दोहन के कारण इस नदी पर दबाव बढ़ा है, फिर भी यह आस्ट्रेलिया की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी बनी हुई है।

महत्त्व

  • आस्ट्रेलिया की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी
  • दक्षिण-पूर्वी कृषि क्षेत्र की जीवनरेखा
  • सिंचाई का प्रमुख स्रोत
  • मरे-डार्लिंग बेसिन की मुख्य धुरी
  • फलोत्पादन, बागवानी एवं कृषि का आधार
  • जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण में महत्त्वपूर्ण
  • आर्द्रभूमियों एवं जैव विविधता का पोषण
  • दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया की आर्थिक धुरी ।

(2) डार्लिंग नदी (Darling River)

डार्लिंग नदी मरे नदी की सबसे बड़ी और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सहायक नदी है। यह नदी न्यू साउथ वेल्स के आंतरिक भागों से होकर बहती है और अंततः मरे नदी में मिल जाती है। डार्लिंग नदी का उद्गम क्वींसलैंड और न्यू साउथ वेल्स की सीमावर्ती आंतरिक नदियों के संगम से माना जाता है। यह नदी शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों से होकर बहती है, इसलिए इसका प्रवाह वर्षा पर अत्यधिक निर्भर रहता है।

डार्लिंग नदी का जल आंतरिक मैदानों की कृषि, पशुपालन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके तटों के समीप विस्तृत चरागाह, गेहूँ उत्पादन क्षेत्र तथा पशुधन-आधारित अर्थव्यवस्था विकसित हुई है। यद्यपि इसका प्रवाह अनियमित और मौसमी है, फिर भी यह नदी मरे-डार्लिंग बेसिन को सशक्त बनाती है और शुष्क क्षेत्रों में जीवन का आधार प्रदान करती है।

डार्लिंग नदी जल संचयन, सिंचाई, पशुपालन तथा ग्रामीण बसावट के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसके प्रवाह क्षेत्र में जल संरक्षण परियोजनाएँ विकसित की गई हैं, जो कृषि उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में सहायक हैं।

(3) मुर्रमबिजी नदी (Murrumbidgee River)

मुर्रमबिजी नदी मरे नदी की एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सहायक नदी है। इसका उद्गम न्यू साउथ वेल्स के पर्वतीय क्षेत्र में होता है। यह नदी दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया की सिंचित कृषि, जलाशय निर्माण, जल प्रबंधन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।

मुर्रमबिजी नदी के तटवर्ती क्षेत्र आस्ट्रेलिया के अत्यंत उत्पादक कृषि क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इसके जल से गेहूँ, चावल, कपास, अंगूर, संतरा तथा अन्य फल-फसलों की खेती की जाती है। इस नदी पर विकसित सिंचाई परियोजनाएँ आस्ट्रेलिया की आधुनिक कृषि प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

 (4) फिट्जरॉय नदी (Fitzroy River)

फिट्जरॉय नदी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की एक महत्त्वपूर्ण नदी है। यह उत्तर-पश्चिमी भाग में प्रवाहित होती है और मुख्यतः मौसमी प्रवाह वाली नदी है। वर्षा ऋतु में इसका प्रवाह तीव्र हो जाता है, जबकि शुष्क ऋतु में इसका जलस्तर काफी घट जाता है। फिट्जरॉय नदी पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के शुष्क एवं विरल आबादी वाले क्षेत्रों में जल उपलब्ध कराती है। यह स्थानीय पशुपालन, जैव विविधता तथा प्राकृतिक पारितंत्र के लिए महत्त्वपूर्ण है। इस नदी के बाढ़ क्षेत्र स्थानीय आर्द्रभूमियों का निर्माण करते हैं, जो पक्षियों और जलीय जीवों के लिए महत्त्वपूर्ण आवास हैं।

(5) बर्डिकिन नदी (Burdekin River)

बर्डिकिन नदी क्वींसलैंड की एक प्रमुख नदी है और पूर्वी तटीय भाग की महत्त्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक है। यह सिंचाई, कृषि, जल भंडारण तथा जलविद्युत के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।  नदी पर निर्मित बाँध और जलाशय क्वींसलैंड की कृषि प्रणाली को सुदृढ़ बनाते हैं। गन्ना, कपास, चारा फसलें तथा अन्य नकदी फसलों की सिंचाई में इसका महत्त्व विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह नदी पूर्वी तटीय कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण आधार है।

(6) कूपर क्रीक (Cooper Creek)

कूपर क्रीक अंत:स्थलीय अपवाह वाली एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण नदी प्रणाली है। यह वर्षा ऋतु में सक्रिय होती है और लेक आयर क्षेत्र में जल पहुँचाती है। शुष्क मौसम में इसका अधिकांश भाग सूख जाता है, किंतु वर्षा ऋतु में यह आंतरिक पारिस्थितिकी को जीवन प्रदान करती है।

कूपर क्रीक शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों की पारिस्थितिकी, आर्द्रभूमियों, पक्षी जीवन तथा मौसमी जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह दर्शाती है कि अल्पकालिक जल प्रवाह भी मरुस्थलीय क्षेत्रों में जीवन, वनस्पति तथा जीव-जंतुओं के संरक्षण का आधार बन सकता है।

() अन्य महत्त्वपूर्ण नदियाँ

आस्ट्रेलिया में उपर्युक्त नदियों के अतिरिक्त भी अनेक क्षेत्रीय नदियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। उत्तरी भाग में विक्टोरिया, ऑर्ड तथा मिशेल नदियाँ स्थानीय कृषि और पारिस्थितिकी में योगदान देती हैं। तस्मानिया की नदियाँ जलविद्युत उत्पादन के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं। पूर्वी तटीय छोटी नदियाँ यद्यपि लंबाई में कम हैं, फिर भी वे तटीय बसावट और जलापूर्ति के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

आस्ट्रेलिया की झीलें

आस्ट्रेलिया की झीलें महाद्वीप की विशिष्ट जलवायु, स्थलरूप तथा अंत:स्थलीय अपवाह प्रणाली को समझने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करती हैं। यद्यपि आस्ट्रेलिया को विश्व का सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप कहा जाता है, फिर भी यहाँ झीलों का भौगोलिक, पारिस्थितिक तथा आर्थिक महत्त्व अत्यंत उल्लेखनीय है। आस्ट्रेलिया की अधिकांश झीलें खारे पानी की, उथली, मौसमी तथा अंत:स्थलीय प्रकृति की हैं। इनका निर्माण मुख्यतः उन निम्नभूमियों में हुआ है जहाँ नदियों का जल समुद्र तक पहुँचकर आंतरिक भागों में एकत्रित हो जाता है। कम वर्षा, उच्च तापमान तथा तीव्र वाष्पीकरण के कारण इन झीलों में स्थायी जल बहुत कम समय तक रहता है। यही कारण है कि यहाँ की अधिकांश झीलें वर्षा ऋतु में जल से भर जाती हैं और शुष्क ऋतु में पुनः नमक मैदानों में परिवर्तित हो जाती हैं।

आस्ट्रेलिया की झीलें केवल जल निकाय नहीं हैं, बल्कि वे महाद्वीप की आंतरिक जल निकासी, मरुस्थलीय भू-आकृति, लवणीय निक्षेप, जलवायु परिवर्तन तथा जैव विविधता के अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इन झीलों का उपयोग जल संचयन, नमक उत्पादन, पारिस्थितिक संरक्षण, पक्षी आवास, भू-आकृतिक अध्ययन तथा पर्यावरणीय अनुसंधान में किया जाता है। विशेष रूप से शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थित झीलें यह स्पष्ट करती हैं कि सीमित जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी प्राकृतिक तंत्र किस प्रकार सक्रिय रहता है। आस्ट्रेलिया की झीलों को सामान्यतः दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

  • खारे एवं अंत:स्थलीय झीलें
  • मीठे जल एवं तटीय झीलें

पहली श्रेणी की झीलें अधिक व्यापक हैं और मुख्यतः आंतरिक शुष्क भागों में स्थित हैं, जबकि दूसरी श्रेणी की झीलें अपेक्षाकृत कम संख्या में तटीय एवं अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं। तस्मानिया तथा दक्षिण-पूर्वी भागों में कुछ मीठे जल की झीलें भी पाई जाती हैं, परंतु महाद्वीपीय स्तर पर खारी झीलों का प्रभुत्व अधिक है।

(1) लेक आयर (Lake Eyre)

लेक आयर, जिसे वर्तमान में काटी थांडालेक आयर (Kati Thanda–Lake Eyre) भी कहा जाता है, आस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी, सबसे प्रसिद्ध तथा भौगोलिक दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण झील है। यह दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 15 मीटर नीचे स्थित होने के कारण महाद्वीप का सबसे निम्न बिंदु भी मानी जाती है। यह झील विशाल अंत:स्थलीय जल निकास प्रणाली का केंद्र है और आस्ट्रेलिया के शुष्क आंतरिक भाग की प्राकृतिक संरचना को समझने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

लेक आयर अधिकांश समय शुष्क रहती है और इसका तल नमक की मोटी परतों से ढका रहता है। किंतु जब क्वींसलैंड और आंतरिक भागों में अधिक वर्षा होती है, तब कूपर क्रीक, डायमंटीना तथा जॉर्जिना जैसी नदियाँ इसमें जल पहुँचाती हैं। ऐसे समय यह विशाल झील जल से भर जाती है और मरुस्थलीय क्षेत्र में अस्थायी आर्द्रभूमि का निर्माण करती है। जल भरने पर यह झील हजारों प्रवासी पक्षियों, जलीय जीवों तथा स्थानीय जैव विविधता के लिए अस्थायी आवास बन जाती है।

 (2) लेक टॉरेंस (Lake Torrens)

लेक टॉरेंस दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की एक विशाल खारी झील है, जो महाद्वीप की प्रमुख अंत:स्थलीय झीलों में गिनी जाती है। यह झील लंबी, उथली तथा लवणीय प्रकृति की है और अपने विशिष्ट शुष्क झील स्थलरूप के लिए जानी जाती है। अधिकांश समय यह झील शुष्क रहती है और इसका तल नमक तथा महीन अवसादों से ढका रहता है।

लेक टॉरेंस अंत:स्थलीय जल निकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसमें आने वाला जल सीमित और अनियमित होता है, अतः यह स्थायी झील का रूप नहीं ले पाती। इसके बावजूद यह भू-आकृतिक अध्ययन, लवणीय मिट्टी, मरुस्थलीय जल विज्ञान तथा पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

(3) लेक गार्डनर (Lake Gairdner)

लेक गार्डनर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की एक प्रमुख खारी झील है, जो अपने विस्तृत नमक मैदानों और शुष्क झील स्थलरूप के लिए प्रसिद्ध है। यह झील अधिकांश समय शुष्क रहती है और इसका तल सफेद नमक की परतों से ढका रहता है, जिससे यह दूर से हिमाच्छादित मैदान जैसी प्रतीत होती है।

लेक गार्डनर का आर्थिक महत्त्व नमक उत्पादन से जुड़ा है। यहाँ से लवणीय निक्षेप प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। साथ ही यह झील शुष्क भू-आकृति, लवणीय निक्षेप तथा जलवायु प्रभावों के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। इसकी विशिष्ट स्थलाकृति इसे भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।

(4) लेक फ्रॉम (Lake Frome)

लेक फ्रॉम दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी-आंतरिक भाग में स्थित एक महत्त्वपूर्ण अंत:स्थलीय झील है। यह झील खारे जल, मौसमी स्वरूप तथा मरुस्थलीय परिवेश के लिए जानी जाती है। अधिकांश समय यह शुष्क रहती है, परंतु वर्षा ऋतु में सीमित जल संचयन के कारण इसका स्वरूप बदल जाता है।

लेक फ्रॉम की विशेषता इसका शुष्क-लवणीय पर्यावरण है। यह झील मरुस्थलीय अपवाह तंत्र, नमक संचयन तथा आंतरिक निम्नभूमि के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण है। यह झील स्थानीय पारिस्थितिकी तथा पक्षी जीवन के लिए भी सीमित किंतु उपयोगी आवास प्रदान करती है।

(5) लेक डिसअपॉइंटमेंट (Lake Disappointment)

लेक डिसअपॉइंटमेंट पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की एक प्रसिद्ध खारी झील है, जो अपने अत्यधिक शुष्क, नमकीन तथा विरल परिवेश के लिए जानी जाती है। इसका नाम यूरोपीय अन्वेषकों द्वारा इस कारण रखा गया था कि यहाँ मीठे जल की आशा के विपरीत केवल लवणीय जल एवं नमक मैदान मिले।

यह झील पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के शुष्क आंतरिक भाग की विशिष्ट मरुस्थलीय परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व करती है। इसका पारिस्थितिक महत्त्व सीमित जल उपलब्धता, लवणीय अनुकूलन तथा मरुस्थलीय जीव-जंतुओं के अध्ययन में है। साथ ही यह झील यह दर्शाती है कि चरम शुष्कता की परिस्थितियों में भी विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र विकसित हो सकते हैं।

आस्ट्रेलिया के झरने

आस्ट्रेलिया के झरने महाद्वीप की प्राकृतिक सुंदरता, स्थलाकृतिक विविधता तथा जल-आधारित पारिस्थितिकी के अत्यंत आकर्षक अंग हैं। यद्यपि आस्ट्रेलिया को विश्व का सबसे शुष्क आबाद महाद्वीप माना जाता है और यहाँ स्थायी जलधाराएँ अपेक्षाकृत कम पाई जाती हैं, फिर भी पूर्वी उच्चभूमि, तस्मानिया, क्वींसलैंड के आर्द्र पर्वतीय क्षेत्र, विक्टोरिया तथा उत्तरी आर्द्र कटिबंधीय भागों में अनेक सुंदर, ऊँचे और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण झरने विकसित हुए हैं। ये झरने मुख्यतः उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है, स्थलरूप में तीव्र ढाल मिलती है तथा चट्टानी संरचना जल के ऊर्ध्वाधर पतन के लिए अनुकूल होती है।

 (1) वॉलामन फॉल्स (Wallaman Falls)

वॉलामन फॉल्स आस्ट्रेलिया का सबसे ऊँचा एकल-प्रपाती झरना है और यह क्वींसलैंड राज्य के वेट ट्रॉपिक्स (Wet Tropics) क्षेत्र में स्थित है। यह झरना गिर्रिंगुन राष्ट्रीय उद्यान (Girringun National Park) में अवस्थित है और लगभग 268 मीटर की ऊँचाई से जल एक ही प्रपात में नीचे गिरता है। इसकी ऊँचाई, जल की एकल धारा तथा आसपास का हरित पर्वतीय परिवेश इसे आस्ट्रेलिया के सबसे प्रभावशाली झरनों में स्थान दिलाता है।

वॉलामन फॉल्स का निर्माण तीव्र ढाल वाली पर्वतीय चट्टानों पर नदी अपरदन की क्रिया से हुआ है। इसका जल ऊपर के वनाच्छादित पठारी क्षेत्र से आता है और नीचे गहरी घाटी में गिरता है। यह झरना केवल भू-आकृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि जैव विविधता, आर्द्र सूक्ष्म-जलवायु तथा पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत प्रसिद्ध है। इसके आसपास घने वन, दुर्लभ पक्षी, आर्द्र वनस्पति तथा पर्वतीय जैव विविधता पाई जाती है।

 (2) रसेल फॉल्स (Russell Falls)

रसेल फॉल्स तस्मानिया का सर्वाधिक प्रसिद्ध और सौंदर्यपूर्ण झरना है। यह माउंट फील्ड राष्ट्रीय उद्यान (Mount Field National Park) में स्थित है और अपनी जलधारा, हरित वनावरण तथा शांत प्राकृतिक परिवेश के कारण अत्यंत लोकप्रिय है। रसेल फॉल्स की सबसे बड़ी विशेषता इसका सीढ़ीनुमा जलप्रपात है, जिसमें जल क्रमिक स्तरों से नीचे गिरता है।

रसेल फॉल्स के आसपास घने समशीतोष्ण वन, फर्न, काई, आर्द्र वनस्पति तथा समृद्ध सूक्ष्म पारिस्थितिकी विकसित हुई है। यह झरना तस्मानिया की प्राकृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसकी रमणीयता इसे पर्यटन, फोटोग्राफी तथा प्रकृति-आधारित अध्ययन के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।

रसेल फॉल्स का महत्त्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तस्मानिया के आर्द्र समशीतोष्ण पारितंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

(3) मैकेन्जी फॉल्स (MacKenzie Falls)

मैकेन्जी फॉल्स विक्टोरिया राज्य के ग्रैम्पियन्स राष्ट्रीय उद्यान (Grampians National Park) में स्थित एक प्रसिद्ध झरना है। यह झरना विक्टोरिया के उन कुछ स्थायी झरनों में से एक है जिनमें वर्ष भर जल प्रवाह बना रहता है। यही कारण है कि यह पारिस्थितिक तथा पर्यटन दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

मैकेन्जी फॉल्स चट्टानी घाटी में स्थित है और इसका जल ऊँचाई से नीचे गिरकर शिलाखंडों के बीच प्रवाहित होता है। यह झरना नदी अपरदन, चट्टानी स्थलरूप तथा जल अपरदन के अध्ययन का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके आसपास का क्षेत्र वन्यजीव, स्थानीय वनस्पति तथा पर्वतीय पारिस्थितिकी के लिए महत्त्वपूर्ण है।

 (4) जिम जिम फॉल्स (Jim Jim Falls)

जिम जिम फॉल्स नॉर्दर्न टेरिटरी के काकाडू राष्ट्रीय उद्यान (Kakadu National Park) में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध और भव्य झरना है। यह झरना ऊँची बलुआ पत्थर की चट्टानों से नीचे गिरता है और वर्षा ऋतु में अत्यंत प्रभावशाली स्वरूप धारण कर लेता है। शुष्क ऋतु में इसका प्रवाह कम हो जाता है, किंतु वर्षा ऋतु में यह उत्तरी आस्ट्रेलिया के सबसे सुंदर झरनों में परिवर्तित हो जाता है।

जिम जिम फॉल्स का परिवेश भौगोलिक तथा पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यह क्षेत्र चट्टानी कगारों, उष्णकटिबंधीय वनस्पति, जलकुंडों तथा समृद्ध वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। यह झरना काकाडू क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का एक महत्त्वपूर्ण अंग है।

 (5) फ्लोरेंस फॉल्स (Florence Falls)

फ्लोरेंस फॉल्स उत्तरी क्षेत्र (Northern Territory) का एक प्रसिद्ध और अत्यंत आकर्षक झरना है। यह लिचफील्ड राष्ट्रीय उद्यान (Litchfield National Park) में स्थित है और अपने दोहरे जलप्रपात, स्वच्छ जलकुंड तथा प्राकृतिक दृश्यावलियों के लिए जाना जाता है। इसका जल दो समानांतर धाराओं में नीचे गिरता है, जिससे इसका दृश्य अत्यंत मनोहारी प्रतीत होता है।

फ्लोरेंस फॉल्स का परिवेश उष्णकटिबंधीय वनस्पति, चट्टानी संरचना तथा जल-आधारित सूक्ष्म पारिस्थितिकी से समृद्ध है। इसके आधार पर निर्मित प्राकृतिक जलकुंड इसे पर्यटन और मनोरंजन की दृष्टि से अत्यंत लोकप्रिय बनाते हैं।

आस्ट्रेलिया के खनिज संसाधन

आस्ट्रेलिया विश्व के सबसे खनिज-संपन्न महाद्वीपों में से एक है और इसकी खनिज संपदा इसकी आर्थिक शक्ति, औद्योगिक विकास तथा वैश्विक व्यापारिक महत्त्व की आधारशिला मानी जाती है। इसकी प्राचीन भूगर्भीय संरचना, स्थिर स्थलमंडलीय स्वरूप तथा करोड़ों वर्षों से चले रहे भूगर्भीय परिवर्तनों ने इसे विविध खनिज संसाधनों से अत्यंत समृद्ध बनाया है। विशेष रूप से पश्चिमी पठार, पिलबरा, कालगूर्ली, माउंट ईसा, क्वींसलैंड, दक्षिण ऑस्ट्रेलिया तथा उत्तर-पश्चिमी तटीय क्षेत्र खनिज संपदा के प्रमुख भंडार माने जाते हैं।

पश्चिमी पठार में प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित शिलाओं का व्यापक विस्तार पाया जाता है, जिनमें लौह अयस्क, सोना, निकेल, ताँबा तथा यूरेनियम जैसे महत्त्वपूर्ण खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसी प्रकार अवसादी बेसिनों में कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार पाए जाते हैं। इस भूगर्भीय विविधता ने आस्ट्रेलिया को विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण खनिज उत्पादक क्षेत्रों में स्थान दिलाया है।

खनन उद्योग आस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय आय, निर्यात, ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक विकास तथा रोजगार सृजन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। खनिज संसाधनों के कारण आस्ट्रेलिया विश्व के औद्योगिक देशों, विशेषकर एशियाई अर्थव्यवस्थाओंजैसे चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारतके लिए कच्चे माल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया है।

प्रमुख खनिज

(1) लौह अयस्क (Iron Ore)

लौह अयस्क आस्ट्रेलिया का सबसे महत्त्वपूर्ण खनिज संसाधन है और यह देश विश्व के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक एवं निर्यातक देशों में अग्रणी स्थान रखता है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का पिलबरा क्षेत्र लौह अयस्क उत्पादन का विश्वविख्यात केंद्र है। यहाँ उच्च गुणवत्ता वाले हेमेटाइट लौह अयस्क के विशाल भंडार पाए जाते हैं, जिनका उत्खनन बड़े पैमाने पर किया जाता है।

पिलबरा क्षेत्र की खदानें आधुनिक तकनीक, विशाल मशीनरी तथा उन्नत परिवहन प्रणाली से जुड़ी हुई हैं। यहाँ से निकाला गया लौह अयस्क रेलमार्गों द्वारा तटीय बंदरगाहों तक पहुँचाया जाता है और वहाँ से चीन, जापान, दक्षिण कोरिया तथा अन्य औद्योगिक देशों को निर्यात किया जाता है। इस लौह अयस्क का उपयोग इस्पात उद्योग में किया जाता है, अतः यह वैश्विक औद्योगिक उत्पादन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

 (2) कोयला (Coal)

कोयला आस्ट्रेलिया का एक अन्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण खनिज संसाधन है। आस्ट्रेलिया कोयला उत्पादन एवं निर्यात में विश्व के अग्रणी देशों में गिना जाता है। न्यू साउथ वेल्स तथा क्वींसलैंड इसके प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। यहाँ उच्च गुणवत्ता वाले तापीय (Thermal) तथा धातुकर्म (Metallurgical) दोनों प्रकार के कोयले के भंडार पाए जाते हैं।

तापीय कोयले का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है, जबकि धातुकर्म कोयला इस्पात उद्योग के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। क्वींसलैंड का कोयला विशेष रूप से इस्पात निर्माण हेतु विश्वविख्यात है। कोयले का निर्यात एशिया एवं यूरोप के अनेक देशों को किया जाता है। कोयला आस्ट्रेलिया की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण आधार है। यद्यपि नवीकरणीय ऊर्जा का महत्त्व बढ़ रहा है, फिर भी कोयला अभी भी ऊर्जा उत्पादन तथा निर्यात आय का प्रमुख स्रोत बना हुआ है।

(3) सोना (Gold)

सोना आस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक तथा आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण खनिज है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का कालगूर्ली क्षेत्र सोना उत्पादन के लिए विश्वविख्यात है। 19वीं शताब्दी के स्वर्ण उत्खनन (Gold Rush) ने आस्ट्रेलिया के आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय विकास को अत्यधिक प्रभावित किया था। इसी स्वर्ण उत्खनन ने अनेक नगरों के विकास, जनसंख्या वृद्धि तथा आर्थिक विस्तार को प्रोत्साहित किया। वर्तमान में भी सोना आस्ट्रेलिया की खनन अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। इसका उपयोग आभूषण, निवेश, बैंकिंग भंडार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा औद्योगिक कार्यों में किया जाता है। सोना निर्यात की दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान खनिज है।

(4) बॉक्साइट (Bauxite)

बॉक्साइट एल्यूमिनियम उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है और आस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख बॉक्साइट उत्पादक देशों में अग्रणी है। क्वींसलैंड, उत्तरी क्षेत्र तथा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। बॉक्साइट से एल्यूमिना तथा तत्पश्चात एल्यूमिनियम का निर्माण किया जाता है। एल्यूमिनियम आधुनिक उद्योगों का अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु है, जिसका उपयोग परिवहन, विमानन, विद्युत, निर्माण तथा पैकेजिंग उद्योगों में किया जाता है।

(5) यूरेनियम (Uranium)

आस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया तथा नॉर्दर्न टेरिटरी इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है, अतः यह ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण खनिज है।

 (6) ताँबा (Copper)

ताँबा औद्योगिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण धातु है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया, विशेषकर ओलंपिक डैम (Olympic Dam) क्षेत्र, ताँबा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। ताँबे का उपयोग विद्युत तारों, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण तथा परिवहन उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है।

 (7) निकेल (Nickel)

निकेल पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का एक महत्त्वपूर्ण खनिज है। इसका उपयोग मुख्यतः मिश्रधातु निर्माण, स्टेनलेस स्टील, बैटरी उद्योग तथा आधुनिक तकनीकी उपकरणों में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण निकेल का महत्त्व और बढ़ गया है। निकेल पारंपरिक उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक हरित प्रौद्योगिकी (Green Technology) की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

(8) प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम

आस्ट्रेलिया के उत्तर-पश्चिमी तट तथा अपतटीय (Offshore) क्षेत्र प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम के प्रमुख भंडारों के लिए प्रसिद्ध हैं। विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी शेल्फ (North West Shelf) क्षेत्र ऊर्जा संसाधनों का महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ से प्राप्त प्राकृतिक गैस का उपयोग घरेलू ऊर्जा, उद्योग तथा निर्यात में किया जाता है। प्राकृतिक गैस स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में महत्त्व प्राप्त कर रही है। तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के रूप में आस्ट्रेलिया इसका निर्यात एशियाई देशों को बड़े पैमाने पर करता है।